परिवार पर झूठे आरोप और मानसिक क्रूरता कानून के दायरे में

By: Red Alert Bureau
Oct 10, 2016


खराब हनीमून भी बन सकता है तलाक का आधार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक विवाहित जोड़े के मामले में महिला द्वारा हनीमून खराब करने और पति तथा उसके परिवार पर झूठे आरोप लगाकर मानसिक क्रूरता करने को मामले में तलाक का आधार बताया है।
उच्च न्यायालय ने मामले को अपवाद की संज्ञा देते हुए कहा कि दम्पत्ति की शादी शुरू से ही सही नहीं चल सकी जो शादी के समय 30 साल से अधिक उम्र के थे और ठीकठाक परिपक्व थे। अदालत ने 12 साल पुराने शादी के बंधन को तोड़ने की अनुमति देते हुए कहा कि पति और पत्नी कड़वी यादों के साथ आए हैं और उनका हनीमून भी खराब हो गया था। जहां महिला ने शादी होने का विरोध किया था और बाद में पति और उसके परिवार वालों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की पीठ ने अपने फैसले में ये टिप्पणियां की। पीठ ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया जिसने क्रूरता के आधार पर शादी को तोड़ने की उसके पति की याचिका को स्वीकार करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादी पति यह साबित करने में सफल रहा कि उनके हनीमून के दौरान पत्नी ने न केवल शादी होने का विरोध किया बल्कि बाद में उसके और उसके पूरे परिवार के खिलाफ शर्मिंदा करने वाले और अपमानजनक आरोप लगाए। 

Tags:



Sponsors

Subscribe To News Letter