नामी हिस्ट्रीशीटर गुलाम नबी को गोलियों से भूना

By: Red Alert Bureau
May 21, 2017

नामी हिस्ट्रीशीटर गुलाम नबी को गोलियों से भूना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को शहर के अपराधियों को सुधर जाने का फरमान सुनाया था और उनके साथ सख्ती से पेश आने के लिए पुलिस को आदेश भी दिया था, लेकिन कानपुर के अपराधियों पर सीएम की घुड़की असर नहीं दिखा। रविवार को चमनगंज के सईदाबाद चैराहे के पास बदमाशों ने नामी हिस्ट्री शीटर गुलाम नबी को सरेआम गोलियों से भून डाला।
हिस्ट्रीशीटर की हत्या के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर एसएसपी सोनिया सिंह भारी फोर्स के साथ घटना स्थल पर पहुंचीं और मृतक के शव को कब्जे में लकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गैंगवार और बवाल की आशंका को देखते हुए चारों ओर फोर्स लगा दी गई है। पुलिस आरोपियों को अरेस्ट करने के लिए नाकेबंदी की हुई है।
सीएम ने कानपुर की कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आईजी जोन, डीआईजी और एसएसपी का ट्रांसफर कर दिया था। जिले की कमान तीन तेज-तर्रार अफसरों के हाथों पर है। बावजूद अपराध कम होने की बजाय बढ़ रहे हैं। आज चमनंगज में कई सालों से अपराध की दुनिया में आंतक बने हुए शातिर अपराधी गुलाब नबी की हत्या से सनसनी फैल गयी। गुलाम नबी बाइक से कहीं जा रहा था, जैसे ही वह सईदाबाद चैराहे के पास पहुंचा ही था कि बाइक सवारों ने उस पर अंधाधुंध फायर झोंक दिया। तीन गोली गुलाम नबी के शरीर में जा धंसी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह बाइक के पीछे बैठा हुआ था।
आरोपियों ने गुलाम नबी पर पांच फायर किएए जिसमें तीन गोली उसके शरीर के अंदर जा घुसीं। पुलिस ने मौके से एक बाइक सहित एक रिवाल्वर बरामद की है। सूत्रों की मानें तो हाल में ही जेल से बाहर आया गुलाम नबी अपने साथी के साथ किसी बिल्डर से मिलने जा रहा था। चैराहे के पास पहुंचते ही बाइक सवार युवक उसके करीब आये और पांच राउंड गोलियां चलायीं, जिसमें से तीन गोली गुलाम नबी के लगी है। बाइक चला रहा उसका साथी मौके से फरार हो गया, जिसके बारें में जानकारी की जा रही है। वहीं इलाके के लोगों का कहना है कि इस हत्या के पीछे शहर के नामी डॉन का हाथ है। उसने जेल में रहते हुए अपने खास गुर्गे के जरिए नबी की हत्या करवा दी।
हिस्ट्रीशीटर की हत्या के बाद शहर में एकबार फिर से गैंगवार की आशंका व्यक्त की जा रही है। गुलाम नबी पर कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं और वह अभी कुछ दिन पहले ही जमानत पर बाहर आया था। सूत्रों की माने तो गुलाम जेल से बाहर आने के बाद इलाके में फिर से उगाही सहित अन्य कामों पर जुट गया था। इसी के चलते उसकी हत्या करवा दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बहुत सालों से यहां पर गोलियां की आवाज नहीं सुनाई दी, लेकिन गुलाम की मौत के बाद क्षेत्र में गैंगवार होने की संभावना बढ़ गई है।

 

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